कोरोना से लड़ाई में देश के वैज्ञानिकों का एकजुट प्रयास शुरू

नई दिल्ली:  कोरोना की खिलाफ लड़ाई युद्धस्तर पर जारी है। एक ओर सरकार अधिक प्रभावित इलाकों को लॉकडाउन कर इसे फैलने से रोकने की कोशिश कर रही है, वहीं देश के सभी वैज्ञानिकों ने इस लड़ाई को सफल बनाने के लिए एकजुट प्रयास शुरू कर दिया है।  कोरोना के खिलाफ वैक्सीन बनाने से लेकर इस पर प्रभावी दवाइयों की खोज और इससे ग्रसित लोगों पर नजर रखने तक के उपाय खोजे जा रहे हैं।
कोरोना वायरस और इससे होने वाली बीमारी का जल्दी समाधान निकालने के लिए शनिवार को वैज्ञानिकों की अधिकार प्राप्त समिति की बैठक हुई। बैठक में देश के सभी शोध संस्थाओं को कोरोना वायरस की समस्या का जल्द समाधान निकालने के लिए एकजुट होकर प्रयास करने का निर्देश दिया गया।
भारत सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार के विजयराघवन ने देश के सभी वैज्ञानिकों के अपने-अपने स्तर पर इस लड़ाई में शामिल होने की अपील की है। कोरोना पर अधिकार प्राप्त समिति ने बायोटेक्नालोजी विभाग, सूचना व प्रौद्योगिकी विभाग, वैज्ञानिक व औद्योगिक अनुसंधान परिषद, डीआडीओ और परमाणु ऊर्जा विभाग को कोरोना वायरस पर क्लीनिकल टेस्टिंग की अनुमित दे दी। इसके तहत अब सभी राष्ट्रीय शोध संस्थान सरकार से कोरोना वायरस की टेस्ट के मान्यता प्राप्त टेस्टिंग लैब से कोरोना वायरस का सैंपल का हासिल कर सकेंगे। ताकि वे इस वायरस पर अपना टेस्ट शुरू कर सकें। इस सभी लेबोरेटरी को अपने शोध के रिजल्ट के एक सार्वजनिक प्लेटफार्म पर शेयर करने को कहा गया, ताकि दूसरे लैब में शोध में लगे वैज्ञानिकों को इसकी जानकारी मिल सके और वे उसमें योगदान कर सकें। इससे शोध की गति भी बढ़ेगी और सटीक भी होगी।

वैज्ञानिक खुद तय करें
देश से भी राज्य, केंद्र और निजी सभी अस्पतालों को इन लेबोरेटरी को क्लीनिकल सैंपल प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराने को कहा है। रविवार को एक साथ कई ट्वीट कर के विजयराघवन ने देश के सभी वैज्ञानिकों से राष्ट्रीय, राज्य और स्थानीय सभी अपनी-अपनी क्षमता के अनुसार कोरोना वायरस की समस्या से निपटने में कारगर तरीका ढूंढने में मदद करने की अपील है। उन्होंने विस्तार से बताया है कि मौजूदा समय में कोरोना के संकट से निपटने में किस-किस चीज की जरूरत है और वैज्ञानिक खुद तय करें कि इसमें वे किस तरह अपना योगदान कर सकते हैं। इनमें कोरोना के मरीजों के इलाज के लिए जरूरी उपकरण, इलाज में लगे डाक्टरों व नसरें के लिए प्रोटेक्टिव उपकरण, जल्द जांच के लिए रैपिड डायगनोस्टिक किट शामिल हैं।
विजयराघवन के अनुसार इन जरूरतों को बड़े पैमाने और तत्काल उपलब्ध कराने का सबसे कारगर उपाय क्या है, कोई नहीं जानता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जब सभी वैज्ञानिक अपने-अपने स्तरों पर प्रयास करेंगे तो कोई बेहतरीन समाधान जरूर निकल आएगा। उनके अनुसार इसके साथ ही मरीजों की संख्या बढ़ने पर उनके हालात पर और संदिग्ध मरीजों पर नजर रखने के लिए मोबाइल एप भी जरूरत पड़ेगी। एप पर आधारित ट्रैकिंग सिस्टम के साथ ही बैक एंड टेक सपोर्ट की प्रणाली खड़ा करने में वैज्ञानिकों की भूमिका अहम हो सकती है।