फांसी का फंदा देख रोया, गिड़गिड़ाया, जमीन पर लेट गया.....निर्भया के दोषियों के आखिरी 30 मिनट

नई दिल्ली: निर्भया को आखिरकार 7 साल बाद इंसाफ मिल गया है 20 मार्च सुबह साढ़े 5 बजे निर्भया के चारों दोषियों को फंसी पर लटका दिया गया। फांसी से पहले 7 साल तक ये दोषी बचते रहे। आखिरी मौके तक दोषियों को बचाने की कोशिश की गई। बाहर दोषियों के वकील कानूनी पेंचों के साथ फांसी टालने की कोशिश करते रहे तो भीतर दोषी माफी की भीख मांगते रहे। फांदोषियों ने खुद को बचाने की हर संभव कोशिश की। वो बिलख-बिलख कर रोए, फांसी घर में जमीन पर लेट गए। हाथ जोड़कर माफी की भीख मांगने लगे, लेकिन उनकी ये कोशिशें काम नहीं आई और आखिरकार निर्भया को इंसाफ मिला।चारों आरोपियों में सबसे ज्यादा डर विनय को लग रहा था। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद से ही वो रोता रहा। उसने रात का खाना तक नहीं खाया। बार-बार बस माफी मांगता रहा।

फांसी से पहले जब दोषियों को नहाने और कपड़े बदलने के लिए कहा गया, तब विनय ने कपड़े बदलने से इनकार कर दिया। वो सिर्फ रोता रहा और रो-रोकर माफी मांगता रहा। जब दोषियों को फांसी के लिए जेल घर लाया गया तो डर के कारण सबकी चीख निकल गई। एक दोषी तो डर के कारण फांसी घर में ही लेट गया और आगे जाने से मना। काफी कोशिशों के बावजूद उसे फंदे से लटकाया गया। फांसी से एक रात पहले चारों दोषियों की मनोस्थित अस्थिर थी। वो बैचैन थे। रात भर रोते रहे। जेल प्रशासन ने उन्हें शांत करने के लिए काउंसलर को बुलाया और जेल में उनके सामने गीता का पाठ किया गया। काउंसर ने उन्हें गीता का वो अध्याय पढ़कर सुनाया, जिसनें कहा गया है कि आत्मा कभी नहीं मरती है। उनके मन को शांत करने की कोशिश की गई। हालांकि चारों के मन में मौत का खौफ था।  फांसी से पहले चारों दोषियों में से मुकेश और विनय ने ही रात का खाना खाया, पवन और अक्षय ने खाना काने से इंकार कर दिया।