रियलिटी चेकः बेंगलुरू में भगवान भरोसे हैं 16000 होम क्वॉरेंटाइन हुए लोग, कर्नाटक में बढ़ सकती है मुश्किल!

नई दिल्ली: कर्नाटक म्युनिसिपल बॉडी बीबीएमपी द्वारा भले ही अभी 2,300 कोरोना रोगियों को होम क्वॉरेंटाइन से संस्थागत सुविधाओं में स्थानांतरित कर दिया गया हैं, लेकिन इससे कोरोना खिलाफ लड़ाई में बेंगलुरू और नगर निकाय यानी बीबीएमपी के कुप्रबंधन की कारगुजारियों के किस्से सामने आ गए हैं। दरअसल, शुरू में सभी कोरोना रोगियों को अस्पताल में भर्ती करने के बाद कर्नाटक सरकार ने स्पर्शोन्मुख रोगियों को होम क्वॉरेंटाइन में रहने की अनुमति दी थी ताकि अधिक अस्पताल के बेड को मुक्त किया जा सके, लेकिन बेंगलुरु में बीबीएमपी की लापरवाही और खराब चिकित्सा सहायता के चलते होम क्वॉरेंटाइन हुए लोगों के लिए बड़ी समस्या उभरकर सामने आने लगी है।

रिपोर्ट के मुताबिक वीवी पुरम के निवासी लतीश मिश्रा ने बताया कि वो गत 26 जुलाई को कोरोना पॉजिटिव टेस्ट के बाद से होम क्वॉरेंटाइन में हैं, लेकिन बीबीएमपी से किसी ने भी उन्हें फोन नहीं किया और न ही किसी तरह से मदद की। बीबीएमपी की ओर से किसी भी चिकित्सकीय सलाह के अभाव में, उन्हें एक स्थानीय स्टोर से पेरासिटामोल खरीदकर खाना पड़ा। वर्तमान में बेंगलुरु में लगभग 16,000 मरीज होम क्वॉरेटाइन में हैं, लेकिन बीबीएमपी उन सभी को दवाएं नहीं दे पा रहा है। एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी ने स्वीकार किया कि जब लोग संस्थागत क्वॉरेंटाइन में थे, तो उनकी दवाओं की आपूर्ति का उचित रिकॉर्ड रखा गया, लेकिन अब हम रिकॉर्ड रखने में सक्षम नहीं हैं। उन्होंने कहा, चूंकि पैरासिटामोल का उपयोग सभी प्रकार के बुखार के लिए किया जाता है, इसलिए इसकी मांग बढ़ गई है। यहां तक ​​कि गैर-कोविद -19 रोगी भी एक ही दवा ले रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप आपूर्ति की कमी है।

वहीं, मामले पर बीबीएमपी का कहना है कि उसका 26 सदस्यीय कॉल सेंटर हर दिन कम से कम 2,000 रोगियों को उनके स्वास्थ्य की जांच करने के लिए डायल कर रहा है और कई रोगियों ने कहा कि वे निजी अस्पताल के पैकेजों का विकल्प चुनने के लिए मजबूर हैं, क्योंकि उन्हें आवश्यक परामर्श नहीं मिल रहा है। अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में 20,000 लोग स्वेच्छा से होम क्वॉरेंटाइन हुए लोगों की निगरानी कर रहे हैं, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। बढ़ते मामलों के साथ लोगों में थकावट भी हो रही है। वहीं, मामलों में उछाल ने अधिकारियों के बीच भय फैला है। एक अन्य स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा कि कई संक्रमण के डर से काम के लिए रिपोर्ट करने में विफल रहे हैं। उन्होंने कहा कि चूंकि कुछ नए लोगों को जोड़ा गया है, इसलिए मैदान पर प्रदर्शन में निरंतरता नहीं है।

एक हफ्ते पहले बीबीएमपी आयुक्त मंजूनाथ प्रसाद ने कहा था कि जो होम क्वॉरेंटाइन में हैं, उन्हें एक निजी संगठन कोविद -19 किट वितरित करेगा, लेकिन अभी तक एक भी किट वितरित नहीं की गई है। किट में एक पल्स-ऑक्सीमीटर, एक थर्मामीटर और दवाएं शामिल थीं। हाल ही में एक काउंसिल की बैठक में यह तय किया गया था कि किट वितरित करने के लिए वार्ड समितियों को 20 लाख रुपए दिए जाएंगे। प्रसाद ने कहा कि 198 वार्ड समितियों में से केवल 50 ने ही लक्ष्य पूरा किया है। उन्होंने बताया कि अब एक नई योजना बनाई गई है, जो डेटा पहले जोनल हेड्स के पास जाता था, वह अब वार्ड स्तर के अधिकारियों के पास जाएगा और स्थानीय पार्षद किट बांटने में शामिल होंगे।