शहर को बेहतर नगरीय सुविधाएं देने के लिए नगर आयुक्त पेश करें कार्ययोजना : इलाहाबाद हाईकेार्ट....

लखनऊ: इलाहाबाद हाईकेार्ट की लखनऊ खंडपीठ ने शहर में साफ सफायी व स्वच्छता की बुरी स्थिति पर गंभीर टिप्पणी करते हुए नगर आयुक्त इंद्रमणि त्रिपाठी को 2 मई तक योजना बनाकर पेश करने का आदेश दिया है कि शहर की साफ सफायी, स्वच्छता केा बेहतर बनाने के लिए निगम के पास क्या कार्ययोजना है।कोर्ट ने शहर में मच्छरेां के प्रकोप, छुट्टा जानवरों खासतौर से गायों के निर्बाध सड़को पर घूमने से आए दिन होने वाली दुर्घटनाएं, शहरी क्षेत्रों में चल रही दूध डेयरियों से होने वाली गंदगी, अवारा कुत्तों के काटे जाने का भय जैसी सभी नगरीय समस्यों पर नगर आयुक्त को आईना दिखाया।

केार्ट ने इंदौर शहर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां की नगरीय सुविधायें देखने लायक हैं। कोर्ट ने नगर आयुक्त से कहा कि लखनऊ को बेहतर क्यों नहीं बनाया जा सकता है। कोर्ट ने नगर आयुक्त से कहा कि वह लखनऊ को एक शानदार शहर बनाने में जुट जाएं और यदि उन्हें किसी प्रकार की आवश्यकता है तो कोर्ट उसके लिए तुरंत आदेश पारित करेगी।केार्ट ने लखनऊ विकास प्राधिकरण के वाइस चेयरमैन व आवास विकास परिषद के कमिश्नर को भी नोटिस जारी कर उनसे भी शहर को बेहतर नगरीय सुविधयें उपलब्ध कराने के बावत भविष्य की कार्ययोजना तलब की है।

यह आदेश जस्टिस मुनीश्वर नाथ भंडारी व जस्टिस सौरभ लवानिया की बेंच ने नगर निगम की ओर से नगर आयुक्त इंद्रमणि त्रिपाठी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। याचिका में नगर आयुक्त ने लखनऊ उपभोक्ता फोरम द्वारा पारित एक आदेश केा चुनौती दी थी जिसमें फोरम ने शहर में साफ सफायी सुनिश्चित करने में असफल रहने के लिए नगर आयुक्त केा जिम्मेदार मानते हुए उन्हें आदेश दिया था कि शिकायतकर्ता को अपनी एक साल का वेतन दें।

इस याचिका पर कोर्ट ने गुरूवार को सुनवायी करते हुए नगर आयुक्त को तलब किया था। आदेश के अनुपालन में नगर आयुक्त त्रिपाठी कोर्ट में हाजिर हुए। कोर्ट ने उनसे कहा कि जहां तक उपभोक्ता फोरम द्वारा उनके वेतन से कतौती का सवाल है तो वह आदेश तो बिना क्षेत्राधिकार के है लिहाज उसे तो स्टे कर दिया जायेगा किन्तु वह यह बतायें कि शहर की साफ सफायी व स्वच्छता अच्छी नहीं है तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है।कोर्ट ने कहा कि यदि शहर में नगरीय सुविधायें अच्छी हों और पुराने स्मारकों आदि को सुंदर बना दिया जाये तो लखनऊ की पहचान निश्चय ही बढ़िया हो जायेगी।

कोर्ट ने नगर आयुक्त से कहा कि यदि वह सच्चे मन से प्रयास करेंगे तो निश्चय ही वह इस काम में सफल हेांगे। कोर्ट ने उनसे कहा कि क्या वह नहीं चाहते कि लोग कहें उनके प्रयास से लखनऊ अच्छा बन गया है। सुनवायी के दौरान कोर्ट के सामने आया कि इस काम में एलडीए व आवास विकास की भी बहुत जिम्मेदारी है तो कोर्ट ने उन्हें भी नेाटिस जारी कर दी। कोर्ट ने इस प्रकरण पर स्वतः संज्ञान ले लिया है।